अैनांण

 

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rajasthan patrika 19 aug

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dainik navjyoti 19 aug

 

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चितरामां मारफत जळसौ—

 

मिजमानां रौ सुवागत—

 

सुवागत अर संस्थान री बात—

 

पोथ्यां रौ विमोचन—

राजस्थानी री बात—

प्रयास संस्थान की भूमि हेतु आर्थिक सहयोग करने पर भामाशाह रामप्रसाद सराफ का सम्मान—

मिजमानां नै अैनांण भेंट—

धन्यवाद भासण—

संचालन—सूत्रधार :

 

खबरां में—

Photo: चूरू में हुए 'अैनांणÓ कार्यक्रम में राजस्थानी भाषा की ग्यारह पुस्तकों का एक साथ विमोचन</p><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br />
<p>प्रांत से प्यार है तो मान्यता की आवाज उठाएं सांसद: देवल</p><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br />
<p>इसी तरह सृजन होता रहेगा तो सरकार से मान्यता की जरूरत नहीं, जनता दे देगी मान्यता : आचार्य </p><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br />
<p>लॉयन न्यूज & चूरू &  संवैधानिक मान्यता के लिए संघर्ष कर रही राजस्थानी भाषा की ग्यारह उल्लेखनीय पुस्तकों का विमोचन मंगलवार को चूरू के सूचना केंद्र में प्रयास संस्थान की ओर से आयोजित समारोह 'अैनांणÓ में ख्यातनाम साहित्यकार डॉॅ.सीपी देवल, कथाकार भरत ओला, रंगकर्मी, पत्रकार व साहित्यकार मधु आचार्य 'आशावादीÓ, संस्कृतिकर्मी केसी मालू ने किया। समारोह में प्रवासी दानदाता रामप्रसाद सराफ का अभिनंदन किया गया।<br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br />
इस मौके पर सीपी देवल ने ग्यारह किताबों के एक साथ विमोचन को राजस्थानी के लिए गर्व भरा क्षण बताते हुए कहा कि राजस्थान के सांसदों में यदि कोई सांस्कृतिक चेतना है और यदि वे अपने प्रांत को जरा भी प्यार करते हैं  और अपने लोगों की गरीबी और अभावों को दूर करना चाहते हैं तो अपनी भाषा की मान्यता के लिए आवाज उठाएं।  उन्होंने अनुवाद की प्रक्रिया पर चर्चा करते हुए कहा कि कुछ लोग अनुवाद को दोयम दर्जे का साहित्य-कर्म मानते हैं लेकिन ऐसे लोग अनुवाद की प्रक्रिया से सही मायने में अनजान है।<br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br />
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रवासी रामप्रसाद सराफ ने दुलाराम सहारण के व्यक्तित्व व कृतित्व की सराहना करते हुए उन्हें चूरू का गौरव बताया और कहा कि वे आज के इस भौतिकवाद के युग में धन के प्रति मोह को छोड़कर साहित्य सेवा जैसा घर फूंक तमाशा देखने का कार्य कर रहे हैं।<br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br />
बीकानेर के वरिष्ठ रंगकर्मी, पत्रकार व साहित्यकार मधु आचार्य ने ग्यारह पुस्तकों के विमोचन को एक ऐतिहासिक क्षण बताते हुए चूरू के साहित्यकारों को साधुवाद दिया और कहा कि साहित्यकार इस तरह से सृजन करते रहे तो राजस्थानी भाषा को सरकार की मान्यता की जरूरत ही नहीं, जनता अपने आप मान्यता दे देगी। उन्होंने कहा कि अनुवाद मूल सृजन से कठिन चुनौतीपूर्ण कार्य है, जिसमें अनुवादक परपीड़ा को अपने हृद्य पर झेलता है। उन्होंने कहा कि इस समारोह से पूरे राजस्थानी जगत में एक हलचल होगी और युवाओं को अधिक बेहतर सृजन की प्रेेरणा मिलेगी।<br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br />
वीणा समूह के अध्यक्ष संस्कृतिकर्मी के सी मालू ने कहा कि अनुवाद से अंतरराज्यीय सांस्कृतिक संबंधों को बल मिलेगा। नोहर से आए वरिष्ठ साहित्यकार भरत ओला ने कहा कि साहित्यकार बेहतर समाज की परिकल्पना करते हुए समाज में मूल्यों की स्थापना करता है। उन्होंने प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद निरंतर सृजन व आयोजन के लिए चूरू के साहित्यकारों व प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि तमाम मुश्किलों के बावजूद आप लोग इतिहास रच रहे हैं। आप कर्ज लेकर साहित्य-सेवा के कार्यों में लगे हैं, भविष्य इसके लिए आपका कर्जदार रहेगा। प्रयास के अध्यक्ष दुलाराम सहारण ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विमोच्य कृतियों का परिचय दिया। वरिष्ठ साहित्यकार भंवर सिंह सामौर ने आभार जताया। संचालन कमल शर्मा ने किया। सोहन सिंह दुलार, बाबूलाल शर्मा, केसी सोनी, उम्मेद गोठवाल, मोहन सोनी, काशीप्रसाद, राजीव स्वामी, महावीर नेहरा, जमील चौहान, माधव शर्मा, राजेंद्र मुसाफिर, शिवकुमार मधुप, कुमार अजय आदि ने माल्यार्पण कर अतिथियों का स्वागत किया।<br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br />
कार्यक्रम में बीकानेर के साहित्यकार राजेंद्र जोशी व बुलाकी शर्मा सहित बड़ी संख्या में अंचल के साहित्यकार मौजूद थे। </p><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br />
<p> सराफ  का हुआ सम्मान</p><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br />
<p>कार्यक्रम के दौरान चूरू जिले की शैक्षिक व सांस्कृतिक गतिविधियों में योगदान के लिए कोलकाता प्रवासी रामप्रसाद सराफ का सम्मान किया गया। उन्हें प्रयास संस्थान की ओर से साफा बांाधकर व शॉल, श्रीफल व अभिनंदन पत्रा भेंट कर सम्मानित किया गया। उन्होंने प्रयास संस्थान की भूमि क्रय के लिए अपनी ओर से एक लाख 85 हजार रुपए देने की घोषणा की। </p><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br />
<p>इन पुस्तकों का हुआ विमोचन</p><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br />
<p>समारोह के दौरान साहित्य अकादेमी की ओर से प्रकाशित विश्वनाथ भाटी द्वारा अनुदित 'नवी दुनिया-नवौ चांनणौÓ, उम्मेद गोठवाल द्वारा अनुदित 'उचक्कौÓ, देवकरण जोशी द्वारा अनुदित 'छांणबीण कमीशनÓ, किशोर कुमार निर्वाण द्वारा अनुदित 'पताळ भैरवीÓ, घनश्याम नाथ कच्छावा द्वारा अनुदित 'घरबायरौÓ, कृष्णा जाखड़ द्वारा अनुदित 'गाथा तिस्ता पार रीÓ और दुलाराम सहारण द्वारा अनुदित 'च्यार पाठÓ व 'हिंद स्वराजÓ पुस्तकों का विमोचन किया गया। इसके अलावा साहित्य अकादेमी की ओर से प्रकाशित 'भारतीय साहित्य के निर्माताÓ सीरिज में किशोर कल्पनाकांत पर केंद्रित सत्यनारायण इंदौरिया की आलोचना पुस्तक, एकता प्रकाशन से छपी चर्चित युवा कथाकार उम्मेद धानियां की मौलिक कहानी पुस्तक 'लेबलÓ और दुलाराम सहारण की ऑटोबायोग्राफी 'आंगणै री ओळूंÓ  का विमोचन किया गया।

 

Photo: चूरू में प्रयास कांनी सूं कालै हुयौ जळसौ.... दैनिक भास्कर री खबर...

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