कन्हैयालाल सेठिया श्रद्धांजलि कार्यक्रम

14 नवम्बर, 2008 गुरुवार,  इंद्रमणि पार्क, चूरू

(११.९.१९१९—११.११.२००८)

राजस्थानी व हिन्दी भाषा में अनेकों पुस्तकों के प्रणेता साहित्य मनीषी पद्मश्री कन्हैयालाल सेठिया की प्रत्येक रचना में दार्शनिकता की पुट समावेशित है। सेठिया ने राजस्थान की भूमि को एक गरिमा प्रदान की। उनकी रचनाओं में मन के भावों को छूने की अद्भुत क्षमता है तभी तो उनकी रचनाओं ने लोक के कण्ठों का वरण किया। १४ नवम्बर, २००८ गुरुवार शाम इंद्रमणि पार्क, चूरू में प्रयास संस्थान की ओर से कविवर कन्हैयालाल सेठिया श्रद्धांजलि कार्यक्रम में सेठियाजी की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित करने के बाद साहित्यकार भंवरसिंह सामौर ने उक्त विचार व्यक्त किए। साहित्यकार बैजनाथ पंवार ने कहा कि जीवन के खट्टे-मीट्ठे अनुभवों को संजोते हुए सेठिया संत भाव से सृजन में आजीवन रत रहे। माटी की गंध उनके हर अंग में समाई थीं और राजस्थानी भाषा की बयार नसों में खून के साथ दौड़ा करती थी। नगरश्री के कार्यकारी अध्यक्ष ऋद्धिकरण मोटेका ने सेठिया को अमर विभूति बताते हुए कहा कि अपनी लेखनी के बूते पर सेठिया जनमानस में छा गए और सदैव विराजमान रहेगें। शिक्षाविद श्यामसुंदर शर्मा ने सेठिया की रचनाओं का स्मरण किया और कभी-कभी जगती पर अवतरित होने वाली विभूतियों में शुमार किया। साहित्यकार सुरेन्द्र सोनी ने एकीकरण के वक्त के माउंट आबू व सिरोही को राजस्थान में शामिल कराने के सेठिया द्वारा किए प्रयासों का उल्लेख किया। समाजशास्त्री डॉ. जगजीतसिंह कविया ने सेठिया को समाज का बड़ा अध्येता बताया और कहा कि उनकी रचनाएं समाज अध्ययन का विस्तृत आगार है।प्रयास संस्थान के अध्यक्ष दुलाराम सहारण ने कहा कि सेठिया ने अमरता के साथ महाप्रयाण किया है। उनकी रचनाएं सदैव हम सबके बीच उनको विराजमान रखेंगी। कादम्बिनी क्लब के संयोजक राजेन्द्र शर्मा मुसाफिर ने रचना ‘कठपुतली` का स्मरण करते हुए सेठिया को यथार्थ का कवि बताया।प्रयास संस्थान के सचिव कमल शर्मा ने कहा कि सेठियाजी की जयंती ११ सितम्बर, २००९ को एक बड़ा आयोजन संस्थान की ओर से करवाया जाएगा। श्रद्धांजलि सभा में श्रवण गुर्जर, भंवरलाल कस्वां, पवन खेमका, अवकाश सैनी, दीपचंद मेघवाल, राजेन्द्र कुमार, मास्टर सुबेसिंह ने भी अपने उद्गार प्रकट किए।कार्यक्रम में सेठियाजी की अमर रचना ‘धरती धोरां री` की रिर्कार्डिंग बजाने के पश्चात् दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

(कन्हैयालाल सेठिया के बारे में ज्यादा जानने के लिए http://www.eakataprakashan.blogspot.com जाकर कन्हैयालाल सेठिया पर क्लिक करें।)


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